- हुईमुकेश द्विवेदी
ब्यूरो सोनभद्र
सोनभद्र जनपद में निजी विद्यालयों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा किताब और ड्रेस के नाम पर एक सुनियोजित वसूली तंत्र चलाया जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि हर स्कूल अपनी अलग-अलग किताबें लागू कर देता है और फिर उन किताबों को खरीदने के लिए एक निश्चित दुकान तय कर दी जाती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये किताबें पूरे बाजार में कहीं और उपलब्ध नहीं होतीं, केवल उसी तय दुकान पर मिलती हैं।
मजबूरी में अभिभावकों को वहीं से खरीदारी करनी पड़ती है, जहां किताबों के दाम बाजार से तीन से चार गुना तक अधिक होते हैं। यही स्थिति स्कूल ड्रेस के साथ भी है, जहां बाहर से खरीदने की अनुमति नहीं दी जाती और तय दुकानों से ही महंगे दामों पर ड्रेस लेना अनिवार्य बना दिया गया है।
स्थानीय अभिभावकों का आरोप है कि यह पूरा खेल स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों की मिलीभगत से चल रहा है, जिसमें कमीशन का बड़ा हिस्सा शामिल है। इस व्यवस्था ने मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों की कमर तोड़ दी है।
अभिभावकों और सामाजिक लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस “तय दुकान व्यवस्था” की जांच कराई जाए और दोषी विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, सभी स्कूलों के लिए एक समान नियम लागू किए जाएं, जिससे अभिभावकों को खुले बाजार से उचित दाम पर किताब और ड्रेस खरीदने की स्वतंत्रता मिल सके।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर शिक्षा के नाम पर चल रहे इस खेल पर प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहेगा और अभिभावकों को इस आर्थिक शोषण से कब राहत
Author: Mukesh Dwivedi
Patrkar


