सिंगरौली. सिंगरौली जिले में जिला जनपद पंचायत सिंगरौली के सीईओ अजीत सिंह बरवा एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। लगातार विवादित व्यवहार और उपेक्षा के आरोप झेल रहे सीईओ पर इस बार जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। जनपद सीईओ ने जनपद सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी, लेकिन बैठक के समय खुद ही उपस्थित नहीं हुए। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह पहली बार नहीं हुआ—इससे पहले भी बुलाए गए बैठक में वे अनुपस्थित रहे थे। लगातार दूसरी बार हुई इस अनदेखी से नाराज़ जनपद सदस्यों ने शुक्रवार को जनपद पंचायत कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
जनपद पंचायत अध्यक्ष सविता सिंह ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए समय निकालकर बैठक में आते हैं, लेकिन सीईओ की गैरहाज़िरी से उनका समय पूरी तरह बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना और समय की कद्र करना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है, लेकिन सीईओ का यह रवैया जनप्रतिनिधियों के प्रति असम्मान दर्शाता है। सविता सिंह ने कहा—“जब अधिकारी ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो विकास योजनाओं की समीक्षा और समस्याओं का समाधान कैसे संभव होगा?”
वहीं सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष देवेंद्र पाठक ने भी सीईओ अजीत सिंह पर कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने बताया कि बैठक का नोटिस जारी होने के बाद भी न तो सीईओ आए और न ही विभाग का कोई अधिकारी मौजूद था। इससे सभी जनपद सदस्य और सरपंच खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए। पाठक ने कहा—“जिले में जिला पंचायत सीईओ से लेकर कलेक्टर और मंत्री तक आदिवासी समाज से होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों का अपमान होना बेहद निंदनीय है। यह रवैया प्रशासन और स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।”
प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और ऐसे अधिकारी पर कार्रवाई की जाए, जो लगातार जनप्रतिनिधियों को नज़रअंदाज़ कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने सिंगरौली जिले में प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधि-अधिकारी तालमेल पर बड़ा सवाल छोड़ दिया है।


